Jul 11, 2009
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक हिंसा के मामले में एक अहम फैसला दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि यह साबित होने पर ही कि पति की गैरवाजिब मांगों से आजिज आकर पत्नी ने खुदकुशी या अपनी जान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, पति को पत्नी के उत्पीड़न का दोषी ठहराया जा सकता है।अदालत ने इसके साथ ही कहा कि लेकिन यह बात पति द्वारा अपनी पत्नी का ख्याल नहीं रखने या उसकी अनदेखी करने पर लागू नहीं होती और इसे भारतीय दंड संहिता [आईपीसी] की धारा 498-ए, 498-बी के तहत पत्नी पर अत्याचार नहीं माना जा सकता। जस्टिस बी।एस. चौहान और मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने सऊदी अरब में रहने वाले एनआरआई एस. बेल्थीसर की याचिका पर यह फैसला दिया। बेल्थीसर ने पत्नी की शिकायत पर केरल पुलिस द्वारा उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए के तहत मामला दर्ज करने को चुनौती दी थी।
Friday, July 10, 2009
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